क्या Iran के सामने झुके Donald Trump?आखिर क्यों रूस के तेल पर राहत ।
अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और तेल एवं गैस ऊर्जा बाजार में इन दिनों बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है रहा है। हाल ही में Trump प्रशासन की तरफ से रूसी तेल पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को फिलहाल एक महीने के लिए हटा लेने की खबर सामने आई है।उनके इस फैसले के बाद विश्व भर में एक बहस शुरू हो गई है कि क्या यह कदम ईरान के बढ़ते पलटवार के दबाव का परिणाम है या फिर सिर्फ अमेरिका और यूरोप में बढ़ते तेल संकट को रोकने की सिर्फ एक रणनीति है।
आखिर क्यों हटाया गया रूसी तेल पर से प्रतिबंध?
अमेरिका पहले से ही Russia के तेल पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए है क्योंकि उसकी आय पर असर ज्यादा पड़े। लेकिन अभी हाल ही के कुछ दिनों से खाड़ी में बढ़ते टकराव, खासकर के Israel और iran के बीच बढ़ती टकराव की ने दुनिया के तेल बाजार को अस्थिरता पैदा कर दिया है।
बुद्धिजीवियों का यह मानना है कि यदि विश्व में तेल की सप्लाई अचानक कम हो जाएगी तो अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से अत्यधिक ऊपर जा सकता हैं इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में वृद्धि से आर्थिक असर पड़ सकता है
इसी स्थिति से बचने के लिए अमेरिका ने अस्थायी रूप सेएक महीने के लिए रूस के तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों को हटाने का फैसला किया।
क्या यह डोनाल्ड ट्रंप की सिर्फ रणनीतिक चाल है?
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लिया गया फैसला किसी के सामने झुक जाना नहीं बल्कि एक रणनीतिक फैसला हो सकता है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने के लिए कभी-कभी ताकतवर देश ऐसे फैसले लेते हैं जो तत्काल मंडराता बड़े आर्थिक संकट को रोकने में मदद करते हैं।
इस फैसले से अगर रूस का तेल पूरी दुनिया के बाजार से बाहर हो जाता तो दुनिया में तेल की भारी संकट हो सकता है।
जानिए इस फैसले से किसे होगा ज्यादा फायदा?
इस फैसले के कई वैश्विक असर हो सकते हैं।
1. रूस को आर्थिक राहत मिल सकती है रूस को कच्चा तेल बेचने का भरपूर मौका मिलेगा जिससे रूस के अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिल सकती है।
2. भारतीय और एशियाई देशों को ज्यादा होगा फायदा,भारत जैसे देश बहुत पहले से ही रूसी सस्ता कच्चा तेल खरीदते ही हैं। प्रतिबंधों के हटाने से अन्य देशों को ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने में काफ़ी मदद मिल सकती है।
3. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में स्थिरता
गैस और तेल की कीमतों में अचानक से आया भारी उछाल आने से विश्व की अर्थव्यवस्था ज्यादा प्रभावित हो सकती थी। ट्रंप के इस फैसले से तेल की कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की जा रही है।
इस फैसले की कुछ देशों की आलोचना।
हालांकि इस कदम की कुछ देशो द्वारा आलोचना भी हो रही है। Volodymyr Zelenskyy सहित अन्य कई यूरोपीय संघ के नेताओं का मानना है कि इससे रूस को आर्थिक स्थिति को लाभ मिलेगा और रूस पर लगे प्रतिबंधों का असर कम हो जाएगा।
कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पश्चिमी देशों की रशिया के खिलाफ बनाई गई पूरी रणनीति कमजोर पड़ सकती है।
ईरान की भूमिका ज्यादा क्यों चर्चा में है?
खाड़ी- में बढ़ते तनाव और तेल की आपूर्ति पर होने वाले खतरे की वजह से Iran का नाम चर्चाओं में आ रहा है। अगर खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है तो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक Hormuz Strait ज्यादा प्रभावित हो सकता है।
यदि ऐसा होता है तो अन्तर्राष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में भारी उथल-पुथल हो सकती है।
इसका निष्कर्ष
रूस के कच्चे तेल पर प्रतिबंधों में अस्थायी छूट को लेकर विश्व भर में अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ देश इसे Donald Trump की रणनीतिक मजबूरी मान रहे हैं, दूसरी तरफ कुछ इसे वैश्विक राजनीति का नया मोड़ बता रहे हैं।
Report by: A.thakur
https://edition.cnn.com/2026/03/13/energy/us-russia-sanctions-relief-oil-hnk-intl
