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दवाओं की कीमत में इतना अंतर क्यों? ₹7 की दवा ₹127 तक! जानें MRP, सस्ती दवाएँ और अस्पताल का खर्च बचाने के तरीके।

दवाओं की कीमत में इतना अंतर क्यों? ₹7 की दवा ₹127 तक! जानें MRP, सस्ती दवाएँ और अस्पताल का खर्च बचाने के तरीके।

Report: Ansh Thakur

Updated: 18.10.2026

नमस्कार! देश में हर घर में हर व्यक्ति किसी न किसी बीमारियों से जूझ रहा है, जिसकी वजह से घर में दवाइयों का खर्च और घर का बजट एकदम बिगड़ सा जाता है अस्पताल के खर्च और उसके महंगे दवा की से जूझना कोई आसान बात नहीं है।

वैसे तो सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के जैसी सुविधा दे रखी है लेकिन निजी अस्पतालों में Middle Class और गरीब लोगों के लिए इलाज में होने वाले खर्च और महंगे दवाइयां आज एक बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है।

कुछ रिपोर्ट के अनुसार देखा जाए तो हाल ही में कुछ बातें उजागर हुई है कि Branded दवाइयों में बहुत जरूरी दवाओं के Manufacturing Cost में एवं Retail Price में बहुत बड़ा अंतर है। आखिर दवा के Manufacturing Cost में एवं Retail Price में इतना फर्क क्यों है, वही दूसरी तरफ Generic दवाइयां और Branded दवाइयों से लगभग 80% कम दाम में बाज़ार में आसानी से मिल जाता है पर कैसे?

आज इसी बात को हम इस लेख द्वारा जानने की कोशिश करेंगे Generic दवाओं की कीमत और Branded दवाओं की कीमत में इतना अंतर क्यों है? और कैसे अस्पताल के खर्च से बचा जा सकता है कैसे दवा का खर्च कम किया जा सकता है।

Manufacturing Cost और Retail Cost जमीन आसमान का फर्क होता है, क्या दवाओं की कीमत में फर्क जानबूझ कर रखते है?

A photo showing the manufacturing cost and retail cost of the medicine

किसी भी आम व्यक्ति के बीमार पड़ते ही सबसे बड़ी और सबसे पहले जरूरत दवा होती है, उसकी सबसे बड़ी चिंता अस्पताल का खर्च दवाओं का खर्च ही होता है। इलाज में होने वाले खर्च जैसे डॉक्टर की फीस, दवाओं के ऊपर होने वाले खर्च, चिकित्सा जांच का खर्च, अस्पताल में भर्ती होने का खर्च, कुल मिलाकर व्यक्ति के घर का बजट लगभग खत्म कर देता है।

कई व्यक्ति तो अपनी जमीन जायदाद बेचकर इलाज का खर्च वहन करते हैं। क्यों? क्योंकि Branded दवाओं के दाम और बिल्कुल उसी Formula से बनने वाला Generic दावों में जमीन आसमान का अंतर है।

किंतु एक आम आदमी इस बात से या तो अनजान है या मजबूर है, क्योंकि Generic दवा को लेने लेने की सलाह डॉक्टर अपनी पर्ची में लिखकर नहीं देता है। यह एक मरीज की अपनी मजबूरी है क्योंकि उसे डॉक्टर द्वारा लिखे गए दवा को अस्पताल से ही खरीदना पड़ता है।

जो लोग इस Generic दवा के बारे में जानते भी हैं कहीं ना कहीं उनमें एक विश्वास की कमी भी है क्योंकि Generic दवा की कीमत कम होने के वजह से लोगों के सोच यह बन जाती है कि Generic दवा से शायद उनका इलाज नहीं हो सकता है या फिर उस दवा में किसी प्रकार की कमी होने की वजह से उसकी कीमत कम है किंतु यह सिर्फ एक एक भ्रम है।

प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के अंतर्गत तय किए गए मूल्यों के आंकड़ों में ज्यादातर दवा जन औषधि के मूल्य में और Branded दवाइयों के मूल्य में 85 से 95% तक का अंतर देखा गया है। यह विकल्प मरीजों के लिए पहले से मिला हुआ है इस विकल्प द्वारा मरीज अपने काफी पैसे बचा सकते हैं।

हालांकि जन औषधि परियोजना के तहत मिलने वाले Generic दवाइयां की कीमत इतना कम होने का अर्थ यह नहीं है कि उसकी Manufacturing Cost कम होती है। दवा बनाने की असली लागत कंपनी के विपणन खर्च, वितरण, और मुनाफा यह अलग-अलग चीज हैं।

कुछ उदाहरण जिससे पता चलता है कि, दवाओं के दाम में फर्क सच है? या कुछ और बात है।

यह उदाहरण सरकारी जन औषधि परियोजना 2023 में जारी किए गए मूल्य की सूचना में दिए गए Generic दवाइयां और Branded दवाइयों के मूल्यों के फर्क को दर्शाता है।

A photo showing the difference between a generic drug and a branded drug

ध्यान रखें कि यह सरकार द्वारा जारी किए गए मूल्यों की तुलना का पुराना आंकड़ा है। ना कि आज के मूल्यों की तुलना वर्तमान में जारी मूल्यों की कीमत, Brand, और Manufacturer को आज के नवीनतम मूल्य को जांचने के लिए आप दिए गए Link द्वारा स्वयं जांच सकते हैं।

https://janaushadhi.gov.in/pdf/Writeup%20on%209%20year%20journey_15062023.pdf

दिए गए उदाहरण से यह बात साफ होती है कि, मरीज को सिर्फ Branded दवा ही नहीं खरीदनी चाहिए, डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाइयों का Composition, Quantity, और उसके प्रकार को समझना बहुत जरूरी है।

जानिए दवा की Manufacturing Cost दरअसल कितनी होती है?

यह ध्यान देने योग्य बात है की दवा की वास्तविक लागत में इस्तेमाल होने वाले औषधीय तत्व, गुणवत्ता की जांच, निर्माण, Packaging एवं अन्य सामग्री और अन्य संबंधित खर्च भी हो सकते हैं जैसे, विज्ञापन, विपणन,Tax एवं Manufacturing से जुड़े अन्य खर्च भी हैं।

दूसरी बात हर Manufacturer का वास्तविक Manufacturing Cost का कोई भी प्रमाण उपलब्ध नहीं है। 2026 फरवरी में सरकार ने यह साफ तौर पर कहा कि किसी भी Manufacturer का Manufacturing Cost संबंधित विभाग में उपलब्ध नहीं रहता है। इसीलिए किसी भी दवा का Mrp ₹100 या ₹200 देखकर यह नहीं कहना गलत है कि वह ₹2 या ₹4 में तैयार हुआ होगा।

दवा अस्पताल से लेना चाहिए या बाहर किसी Medical Store से, अंतर क्या है?

Difference in the price of medicine in hospital pharmacy and outside medical store example

यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है अगर इलाज सरकारी अस्पताल में होता है तो, वहां पर मुफ्त में दवाइयां मिल जाती है या बहुत ही कम कीमत पर दवाइयां खरीदा जा सकता है।

अगर निजी अस्पतालों में में इलाज होता है तो हो सकता है दवाइयां आपको बाहर से खरीदने की जरूरत पड़ जाए क्योंकि अस्पताल के ही Farmacy से दवाइयां लेने पर आपको किसी प्रकार का छूट नहीं दिया जाता है, इसके विपरीत बाहर किसी Medical Store से दवाइयां लेने पर 20% से लेकर 30% तक छूट भी मिलने की संभावना होती है।

दवाओं की कीमत में अंतर जानने के लिए पहले करें ये काम।

1️⃣ सबसे पहले अस्पताल के Farmacy में जाकर डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाइयों का कुल राशि का पता करें।

2️⃣ फिर बाहर तीन या चार Licence प्राप्त Medical Store पर जाकर उसी दवा के दाम के बारे में पता करें किंतु ध्यान रहे दवा का नाम उसकी मात्रा, उसका Mg और उसके Retail Price के अंतर को भी देखें।

3️⃣ दवा खरीदने से पहले इलाज कर रहे डॉक्टर से सलाह अवश्य ले की क्या उसी Composition की दवा कम कीमत पर उपलब्ध है या नहीं और अगर दवा खरीदते हैं तो डॉक्टर से इस बात की पुष्टि जरूर करें।

4️⃣ जन औषधि केंद्र द्वारा भी कीमतों का पता करें अगर कम कीमत में उसी Composition का दवा उपलब्ध है तो यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

5️⃣ दवा कहीं से भी ले उसके Bill और उसके Packet को संभाल कर रखें एवं दवा का MRP, Batch Number, Expiry Date को जरूर जांचें।

अस्पताल के भारी भरकम खर्च से कैसे बचे?

A photo showing how to avoid hospital expenses

अस्पताल में मरीज को भर्ती करने से पहले Doctor और Account Department में भर्ती होने के कुल खर्च और दवाओं के खर्च के बारे में बात करें, दवा में होने वाले खर्च और इस्तेमाल होने वाले Medical Equipments को अपनी Diary में Note करें अस्पताल से छुट्टी लेते समय अस्पताल का Bill अच्छी तरह जांचें।

ध्यान दें कि उसमें इस्तेमाल होने वाले Medical Equipments कहीं इस्तेमाल से ज्यादा तो नहीं लिखा गया है? मरीज को अस्पताल द्वारा दिए जाने वाले Injection और दवाओं का हिसाब रखें आपका पूरा हक बनता है यह जानने का कि डॉक्टर द्वारा Injection किस नाम से दिया जा रहा है और किसके लिए दिया जा रहा है।

डॉक्टर द्वारा दिए जाने वाले दवाओं का दाम अस्पताल के बाहर Discount देने वाले Medical Store में पूछे अगर Medical Store में दवा Discount Rate में मिल रहा है तो, डॉक्टर से बात करके Medical Store से दवा खरीद कर दें। और बेहतर बचत कर देने के लिए Generic Medicine Medical Store में पता करें और डॉक्टर की सलाह लेकर Generic Medicine का विकल्प भी पूछे।

जरूरी सूचना: बिना डॉक्टर के सलाह के बिना किसी प्रकार के दवाइयों में बदलाव न करें एक ही Composition के अलग Brand या फिर सस्ते Brand वाली दवाइयां से जरूरी नहीं है कि मरीज के लिए सस्ती विकल्प है। अपने मन से किसी प्रकार की दवा न दे।

अंतिम निष्कर्ष: दवाओं की कीमत और उसके बढ़ते दाम आज के समय में मरीजों के लिए गंभीर आर्थिक मुद्दा है। उचित मूल्य नियंत्रण एवं पारदर्शी मूल्य सूचियां सस्ती गुणवत्ता वाली दवाइयों की उपलब्धता एवं अस्पतालों के स्पष्ट रूप से दिए गए Bill मरीजों की समस्या को कम कर सकते हैं।

क्योंकि मरीज का अधिकार सिर्फ इलाज पाना ही नहीं सस्ती दवाइंया पाना भी उनका अधिकार है।

Disclaimer: यह लेख सिर्फ एक जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से लिखा गया लेख है। उन सभी लोगों के लिए जो अपनों के ईलाज और दवाओं की कीमत एवं अस्पताल के खर्चे से परेशान है। ऐसे लोगों को जानकारी एवं सुझाव प्रदान करने की कोशिश मात्र है।

Indinewzx किसी भी प्रकार का दवा और इसकी गुणवत्ता और दवाओं की कीमत को लेकर कोई दावा नहीं करता है, न ही किसी प्रकार का वित्तीय लेन देन और घाटे के लिए जिम्मेदार है। अगर लेख पसंद आयी हो तो, अपने दोस्तों से भी साझा करे, और Comment Box में आपकी अपनी राय दर्ज करके हमे प्रोत्साहित भी करे।

धन्यवाद 🙏

Report: Ansh Thakur ( Creator Blogger Writer)

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