SC/ST Act का Misuse? कितने केस फर्जी, कितने साबित—सरकारी आंकड़ों और कोर्ट के फैसलों से जानिए पूरा सच!

SC/ST Act का Misuse? कितने केस फर्जी, कितने साबित—सरकारी आंकड़ों और कोर्ट के फैसलों से जानिए पूरा सच!

Report: Ansh Thakur 

Update: 25.09.2026

आजकल देश भर में SC/ST Act का मुद्दा फिर से जोरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। क्योंकि हाल ही में IIT Mumbai में हुए IIT के विद्यार्थी का Suicide कर लेना और इसी Campus के ही एक Professor पर Suicide करने वाले छात्र के परिजनों का आरोप लगाने के कारण SC/ST Act फिर से एक बार सवाल के घेरे में है।

SC/ST Act यानी Schedule Cast And Schedule Tribe (Prevention of Atrocities) Act, 1989 इस Act का मुख्य उद्देश्य SC/ ST के जातिगत समुदाय को मुख्य रूप से सुरक्षा देना एवं अत्याचारों से सुरक्षित करना है, एवं पीड़ित व्यक्ति को राहत देना और कानूनी सहायता दिलाना है।

लेकिन देखा जाए तो, पिछले कुछ वर्षों के उपरांत कुछ मामलों में इस कानून के गठित दुरुपयोग को को लेकर प्रशासन और अदालतों के सामने सवाल उठाया जा रहा की क्या, फर्जी मुकदमे के द्वारा किसी को डरा कर एवं धमकाकर सरकार द्वारा राहत एवं मुआवजा पाने की कोशिश होती है?

पहले इन सवालों को कुछ आंकड़ों द्वारा जानकर और समझने की कोशिश करते है।

वर्ष 2019 से लेकर 2023 तक कुल कितने मामले False Declare हुए?

SC/ST Act
A message from the Allahabad High Court’s decision

केंद्र द्वारा लोकसभा में उपलब्ध कराए गए NCRB के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से लेकर 2023 के दौरान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम 1989 के तहत अनुसूचित जाति से संबंधित 2,62,430 एवं अनुसूचित जनजाति से संबंधित कुल 47,659 मामले दर्ज कराए गए। यानी कुल मिलाकर 3,10,089 इस अवधि के दौरान दर्ज हुए हैं।

अब ध्यान देने वाली बात यह है कि, दर्ज कराए गए कुल मामलों में 31,866 अनुसूचित जाति से संबंधित मामले और अनुसूचित जनजाति से संबंधित 6,059 मामलों का अंतिम फैसला False Report Declare किया गया है।

यहां ध्यान देने योग्य बात यह भी है की अंतिम फैसला False Report Declare होने का मतलब यह नहीं है कि, पूरे मामले में शिकायतकर्ता ने जानबूझकर मुआवजा लेने के लिए झूठ बोला था। यह कानूनी जांच के बाद आने वाले अलग श्रेणी में 37,925 मामले फर्जी थे और मुआवजा के लिए किए गए थे।

क्या मुआवजा के लिए फर्जी केस किए जाते हैं?

SC/ST Act
A photo of the Allahabad High Court

कुछ केस में अदालतों के सामने कुछ ऐसी परिस्थितियों नजर में जरूर रहे हैं।

उदाहरण: वर्ष 2024 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के 0पएक मामले में शिकायकर्ता ने अदालत के सामने पूर्ण रूप से स्वीकार किया कि उसने दबाव में फर्जी फर्जी दर्ज कराई थी। और उस दौरान उसे SC/ST Act के तहत ₹75000 सरकारी सहायता के रूप में प्राप्त हुआ था। जिसे वापस करने के लिए कोर्ट द्वारा आदेश दिया गया है। कोर्ट ऐसे मामलों में सरकार द्वारा दिए जाने वाले राहत राशि को लेकर संभावित दुरुपयोग पर गंभीर टिप्पणी की है।

किंतु पूर्ण रूप से बिना जांच के यह नहीं कहा जा सकता है की, SC/ST Act का दुरुपयोग हो रहा है, या SC/ST Act मुआवजा राशि के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

वर्ष 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट मैं इस मामले की जांच क्यों कराई?

इसी साल 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने झांसी शहर का एक ऐसा मामला निकाल कर आया जिसमें अदालत द्वारा यह बताया किया गया कि, एक वकील और उसके परिवार द्वारा अलग-अलग अपराधी मुकदमे के तहत ₹23,36,250 की राशि का मुआवजा लिया गया इसके बावजूद 10 से लेकर 12 तक अन्य अलग-अलग मुकदमे राहत कोष के लेने के लिए अभी भी लंबित है।

इस रांची के केस के तर्ज पर ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस तरह के मामलों में राहत राशि के दावों एवं भुगतान के प्रक्रिया की बड़े स्तर में व्यापक जांच का आदेश दिए हैं। साथ ही अदालत में पूर्ण रूप से यह स्पष्ट किया कि बार-बार केस दर्ज होना यह साबित नहीं करता की हर केस मुआवजे के लिए ही किया गया है। किंतु जब संख्या अधिक हो तो यह जांच का विषय बन जाता है।

यानी कोर्ट का यह भी करना है कि, इसका मतलब यह नहीं है कि पूरा सिस्टम ही फर्जी है। कोर्ट का सिर्फ यह वास्तविक सवाल था कि पीड़ितों के लिए सरकार द्वारा दी जाने वाली राहत सहायता कही फर्जी दावों का माध्यम तो नहीं बनते जा रहा है।

क्या लोग SC ST Act को दबाव या डराने के लिए इस्तेमाल करते हैं?

SC/ST Act
Warning and message about the false SC ST Act

देखा जाए तो अदालतों में कुछ ऐसी बातें हुई है, ऐसी परिस्थितियों सामने आई है जहां SC ST Act को ऐसे विवादों में इस्तेमाल किया गया है, जिन्हें अदालतों ने आपराधिक मामलों में इस Act के दुरुपयोग के रूप में इस्तेमाल करते हुए कहा है।

जैसे कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह भी माना है कि, यदि किसी प्रकार के विवादों में SC ST Act की कानूनी शर्ते पूरी नहीं होती है तो, इस तरह कार्रवाई जारी रखना न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग बन जाता है। उस स्थिति में कोर्ट इसमें हस्तक्षेप कर सकता है।

लेकिन यहां भी बेहद सावधानी बरतनी जरूरी हो जाती है, क्योंकि किसी भी केस का खारिज होना अपने आप में यह साबित नहीं करता है कि शिकायत करने वाले व्यक्ति में जानबूझकर शिकायत दर्ज कराई थी।

देशभर में अब तक कितनी मुआवजा की राशि दी गई है।

SC/ST Act
Something related to the judiciary with the Indian flag

केंद्र सरकार के एक जारी किए गए रिपोर्ट के अनुसार 2022 से लेकर 2023 एवं 2024 से लेकर 2025 के बीच कुल जारी किए गए संभावित राशि राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर कुल ₹1,423.30 करोड़ अब तक मुआवजा के रूप में जारी की गई है।

जो कुछ इस प्रकार से है।

1. वर्ष 2022-23 के मध्य दी जाने वाली मुआवजा राशि ₹392.71 थी जिनमें से 88,172 पीड़ितों को यह मुआवजा राशि प्रदान की गई।

2. वर्ष 2023-24 के मध्य दी जाने वाली मुआवजा राशि ₹535.30 करोड़ थी जिनमें से 79,667 पीड़ितों को राहत पहुंचाया गया।

3. और 2024-25 के मध्य दी जाने वाली मुआवजा राशि ₹495.29 करोड़ थी जिससे 99,965 पीड़ितों को राहत प्रदान की गई है।

दूसरी तरफ सरकार ने यह पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है कि, वास्तविक रूप से पीड़ितों को दी जाने वाली सहायता राशि का कोई ठोस आंकड़ा केंद्र के पास भी मौजूद नहीं है, इसलिए पूरे देश में फर्जी मामलों में कितनी भुगतान की गई बताना तभी संभव है जब सरकारी आंकड़े सरकार के पास मौजूद हो।

विश्लेषण: क्या दावा सही है और क्या गलत ऐसा पूर्ण रूप से कहना मुश्किल है। किंतु आंकड़े यह बताते हैं कि, कुछ मामले Police Record में “Final Report False” के तौर पर दर्ज हुए हैं। जबकि अदालतों ने कुछ मामलों में SC/ST Act तथा राहत के लिए दी जाने वाली राशि के व्यवस्था को संभावित दुरुपयोग लेकर चिंता जताई है। वहीं दूसरी तरफ गलत तरीके से प्राप्त की गई राहत राशि को अदालतों द्वारा वापस भी कराई गई है।

अगर दूसरे नजरिया से देखा जाए तो यह कहना सही नहीं है कि, SC/ST Act केस में ज्यादातर मामला फर्जी है। यह पूरे देश में इस तरह के कोई Group फर्जी केस करके मुआवजा लेने का कार्य करता है। ऐसा कोई भी आंकड़ा देश व्यापक रूप से मौजूद नहीं है।

अदालतों की चिंता सिर्फ यह है कि, कानून का उद्देश्य सिर्फ इतना है, सही रूप से पीड़ित लोगों को ही सहायता राशि मिले इसलिए जिस जगह भी वास्तविक रूप से अत्याचार हो या पीड़ित हो उन्हें तुरंत न्याय मिले। और जहां झूठ और गलत तरीके से सरकारी मुआवजा लेने की प्रक्रिया सामने आए वहां पूर्ण रूप से जांच और सख्त कार्रवाई की जाए।

Disclaimer: यह लेख सिर्फ एक जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से लिखा गया लेख है। उन सभी लोगों के लिए जिन्हें SC/ST Act को लेकर भ्रांतियां एवं शिकायतें हैं। उन सभी लोगों को जानकारी एवं सुझाव प्रदान करने की कोशिश मात्र है। अगर लेख पसंद आयी हो तो, अपने दोस्तों से भी साझा करे, और Comment Box में आपकी अपनी राय दर्ज करके हमे प्रोत्साहित भी करे।

धन्यवाद 🙏

Report: Ansh Thakur ( Creator Blogger Writer)

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http://Supreme Court refuses to entertain plea alleging misuse of SC/ST Act https://share.google/t0lXb9sxCgpESFIVj

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